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खेल जगत

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भारत में अमेचर गो कार्ट टूर्नामेन्ट के दूसरे संस्करण की शुरूआत

गुरुग्राम 5 जुलाई, 2018: रेसिंग का अद्भुत अनुभव और अपने प्रकार का पहला अमेचर गो कार्ट टूर्नामेन्ट, रेड बुल कार्ट फाइट अपने दूसरे संस्करण के साथ लौट आया है । भारत के सबसे तेज अमेचर कार्ट रेसर की तलाश में यह टूर्नामेन्ट 1 जुलाई, 2018 से 30 सितंबर 2018 तक खेल एवं मनोरंजन केन्द्र स्मैश में हो रहा है।
रेड बुल कार्ट फाइट का लक्ष्य शौकिया रेसर्स और रेसिंग प्रेमियों को कार्टिंग का अनुभव लेने का मौका देना और एक प्रतिस्पर्द्धी तथा मजेदार अनुभव देना है। यह विश्व के उत्कृष्ट एफ 1 ड्राइवर्स को चुनौतीपूर्ण यास मरीना सर्किट पर देखने का एक सुपहरा मौका है। रेड बुल कार्ट फाइट नेशनल चैम्पियन 2018 को इस वर्ष की एफ 1 चैम्पियनशिप अबू धाबी ग्रैण्ड प्रिक्स 2018 के ग्रैंड फिनाले में जाने का अवसर मिलेगा।

अपने अनुभव के बारे में रेड बुल कार्ट फाइट 2017 के भारतीय विजेता और अबू धाबी ग्रैंण्ड प्रिक्स की यात्रा जीतने वाले मोनिश जैन ने कहा, ‘‘पिछले वर्ष रेड बुल कार्ट फाइट में मेरी जीत के बाद मुझे जो अवसर मिला, उसके लिये मैं आभारी हूँ। मैं अपने अनुभव के बारे में सोचता रहता हूँ और उन क्षणों को फिर से जीता हूँ, जिन्हें मैंने जीवनभर के लिये संजो रखा है। पिछले दशक में मैं रेसिंग के इतना करीब नहीं था, लेकिन रेड बुल कार्ट फाइट ने एक दशक बाद मेरे भीतर के रेसर को जगा दिया। रेड बुल कार्ट फाइट ने न केवल मेरे सपनों को पूरा किया, बल्कि मुझे मोटरस्पोर्ट्स के सर्वश्रेष्ठ मेकेनिक्स और पिट स्टाफ से मिलने का मौका भी दिया। इसके लिये रेड बुल को धन्यवाद, जिन्होंने मुझे पिछले वर्ष नवंबर के तीसरे सप्ताह में यास मरीना सर्किट पर 2017 फार्मूला 1 सीजन फिनाले, अबू धाबी ग्रैंड पिक्स की यात्रा का अवसर दिया। यह एफ1 का मेरा दूसरा अनुभव था, इससे पहले मैंने बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर इंडियन ग्रैंड प्रिक्स देखा था। पिट लेन पर चलने का अनुभव अविस्मरणीय है और मैंने मैन ग्रैण्डस्टैण्ड के पीछे डेमो पिट स्टॉप पर भी हाथ आजमाया। हाई-पावर्ड नट रिमूवर को नियंत्रित करना अत्यंत कठिन है। मैं द्वितीय संस्करण के सभी प्रतियोगियों को शुभकामनायें देता हूँ और उनके जीतने की कामना करता हूँ।’’
यूरो जेके सीरीज में भाग लेने वाली भारत की पहली महिला ड्राइवर और रेड बुल एथलीट मीरा एर्डा ने कहा, ‘‘रेड बुल के साथ मेरा जुड़ाव काफी अच्छा रहा है और यह ब्रांड रेसर्स की पसंद को समर्पित है। मैं उनके द्वारा रेड बुल कार्ट फाइट लॉन्‍च किये जाने से भी प्रसन्न हूँ, जो कि शौकिया ड्राइवर्स को रेसिंग और प्रतिस्पद्र्धा का मजेदार अनुभव देता है। मैं द्वितीय संस्करण की प्रतीक्षा में हूँ और मुझे उम्मीद है कि प्रतियोगी इस चुनौती को स्वीकार कर इसके रोमांच का पूरा अनुभव लेंगे।’’

रेड बुल कार्ट फाइट 2018 के क्वालिफायर्स की शुरूआत जुलाई 2018 में होगी और यह मुंबई तथा दिल्ली में सितंबर 2018 के अंत तक चलेंगे। एक दिवसीय क्वालिफायर्स बैंगलोर, हैदराबाद और चेन्नई के मेको कार्टोपिया में होंगे। 16 वर्ष से अधिक आयु की श्रेणी के लिये बड़ौदा में एर्डा’ज स्पीडवे पर प्रतियोगिता होगी और राष्ट्रीय फाइनल अक्टूबर में होंगे।

रेड बुल कार्ट फाइट 2018

सिटी क्वालिफायर्स

अवधिः जुलाई से सितंबर 2018 (प्रतिदिन)

स्थानः स्मैश, लोअर परेल, मुंबई

स्मैश स्कायकार्टिंग, सेक्टर 29, गुरूग्राम

एक दिवसीय क्वालिफायर्स
अवधिः अगस्त-सितंबर 2018 (1 दिवसीय क्वालिफायर)
स्थानः बैंगलोर, हैदराबाद और चेन्नई में मेको कार्टोपिया

बड़ौदा में एर्डा’ज स्पीडवे
सिटी फाइनल्स

तिथिः अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2018 के पहले सप्ताह में

स्थानः स्मैश, लोअर परेल, मुंबई

स्मैश स्कायकार्टिंग, सेक्टर 29, गुरूग्राम

सिटी क्वालिफायर्स में सबसे तेज लैप टाइमिंग के आधार पर अगस्त, सितंबर और अक्टूबर की शुरूआत में सिटी फाइनल होंगे, जिनमें स्मैश मुंबई और गुरूग्राम में पिछले माह के शीर्ष 20 रेसर प्रत्येक शहर में माह के शीर्ष 3 स्लॉट्स के लिये प्रतिस्पर्द्धा करेंगे। रेसिंग के प्रति लगन को बढ़ाने के लिये स्मैश के दैनिक विजेताओं को रेड बुल कार्ट फाइट की मर्चेंडाइज दी जाएगी। नेशनल फाइनल्स में कुल 22 रेसर प्रतिस्पद्र्धा करेंगे; मुंबई और गुरूग्राम से तीनों माह के शीर्ष 3 और बैंगलोर, हैदराबाद, चेन्नई और बड़ौदा के क्वालिफायर्स का एक-एक विजेता।

अक्टूबर में नेशनल फाइनल्स के विजेता को 25 नवंबर के अबू धाबी ग्रैंड प्रिक्स में जाने का मौका मिलेगा

रजिस्‍ट्रेशन

· प्रतियोगी सिस्टम में एक स्थान पर रजिस्टर कर सकते हैं, जिसमें उनका नाम, कॉन्टैक्ट नंबर, ई-मेल आईडी और एक वेबकैम फोटो होगा।

· प्रतियोगी अपने सोशल मीडिया पेज से भी रजिस्टर कर सकते हैं।

· रजिस्ट्रेशन सीधे कार्ट टाइमिंग सिस्टम से जुड़ा होगा।
टाइमिंग सिस्टम

· प्रतियोगी का नाम और टाइमिंग एक सेकंड के सौवें हिस्से के अनुसार प्रदर्शित होगा

· प्रत्येक रेस के बाद, लीडर बोर्ड को रैंकिंग के साथ अपडेट किया जाएगा (दिन और माह की टॉप रैंकिंग)

अथॉरिटी के मिलीभगत से चल रहा काम।हरेंद्र भाटी

ग्रेटर नोएडा

हरेंद्र भाटी
(एक्टिव सिटीजन टीम ग्रेटर नोएडा गौतम बुद्धनगर
गरीबों पर सितम बिल्डर पर रहम। ग्रेटर नोएडा में बन रहे बीटा प्लाजा ने घेर ली अथॉरिटी की जमीन। प्लाजा के सामने कच्ची सड़क पर लगा दिए टाइल्स। ग्रेटर नोएडा में गिरते भू जल स्तर की भी अधिकारियों को नहीं परवाह। अथॉरिटी के मिलीभगत से चल रहा काम।
अतिक्रमण केवल ग़रीब ठेले-खोंचे वाले ही नहीं करते । ग्रेटर नोएडा की बड़ी-बड़ी शार्क मछलियां भी सड़कों और बाज़ारों की जगह खा जाने पर आमादा रहती हैं

इधर सेक्टर बीटा 1 के रिलाइंस फ्रैश को ही देख लीजिए । मार्किट की आधी जगह में तरबूज़ और नारियल पानी की मंडी लगा रखी है । दिन रात जनता के उपयोग की खुली जगह स्टोर की तरह प्रयोग में लाई जाती है । सामान लाने वाला ट्रक, सामान सीधा स्टोर पर ही उतारे, इसलिए सरकार द्वारा लगाई गई रेलिंग ही तोड़ दी । इन धन कुबेरों के सामने जो भी बाधा आती है – उखाड़ फेंकते हैं ।

ऐसी ही एक और शार्क मछली है *बीटा प्लाजा* । मार्किट के सामने वाली जगह को ख़ूबसूरत बनाने के लिए सारे स्थान पर टाइल ही टाइल लगा डाली । इस स्थान की भूमि प्राकृतिक रूप में रहनी चाहिए थी जिससे जल संरक्षण हो सके । बरसात का पानी ज़मीन में जा सके । पर सारे नियमों को ताक में रख कर सारी ज़मीन को पक्का करवा डाला ।

मेरा ग्रेटर नोएडा के संबंधित अधिकारियों से निवेदन है कि इन शार्क मछलियों के पैने दांतों को तोड़ कर शहर की खूबसूरती को बचाया जाए वरना आने वाले समय में ग्रेटर नोएडा की एक एक इंच ज़मीन इनके जबड़े की गिरफ्त में होगी ।।

कैंब्रिज स्कूल ने श्री राम अनुग्रह नारायण मेमोरियल अन्तर स्कूल महिला फुटबॉल टूर्नामेंट पर कब्ज़ा

श्री चित्रगुप्त सभा ट्रस्ट नॉएडा और श्री नारायण सांस्कृतिक चेतना न्यास द्वारा रामलीला मैदान में चार दिन की श्री राम अनुग्रह नारायण मेमोरियल अन्तर स्कूल महिला फुटबॉल टूर्नामेंट 2018 – 19 का आज अंतिम दिन था| इन चार दिनों में 20 स्कूलों की कन्याएं फुटबॉल प्रतियोगिता में भाग ले रही थी व विजेता टीम कैंब्रिज स्कूल ने आर्मी पब्लिक स्कूल को एक रोमांचक मुकाबले में पराजित कर के 75000 के नकद इनाम को हासिल किया| दुसरे, तीसरे व चौथे स्थान पर आने वाली टीमों को क्रमशः आर्मी पब्लिक स्कूल , डीऐवी स्कूल, लार्ड महावीरा को 60000, 45000 व 30000 नकद इनाम दिया गया | इसके अलावा बेस्ट गोलकीपर आर्मी पब्लिक स्कूल की निहारिका सिंह को 5000, बेस्ट स्कोरर कैंब्रिज की रश्मिका ने 5000 का व श्रुति को 10000 व बेस्ट टीम श्याम सिंह स्मारक को 21000 का नकद इनाम भी दिया गया |

कार्यक्रम में आज कुल 4 मैच हुए जिनमे पहला मैच लार्ड महावीरा व कैंब्रिज स्कूल के बीच हुआ रोमांचक मुकाबले व कड़ी टक्कर के बीच कैंब्रिज स्कूल विजयी रहा| दूसरा सेमीफइनल मैच डीऐवी स्कूल व आर्मी पब्लिक स्कूल के बीच हुआ व कड़ी टक्कर के बीच आर्मी पब्लिक स्कूल विजयी रहा तीसरा मैच डीऐवी स्कूल व लार्ड महावीरा के बीच हुआ रोमांचक मुकाबले व कड़ी टक्कर के बीच डीऐवी स्कूल विजयी रहा |
इसके बाद हुए फाइनल मुकाबले मे आर्मी पब्लिक स्कूल ने कैंब्रिज स्कूल को कड़ी टक्कर दी लेकिन पेनल्टी शूटआउट के बाद सडेन डेथ में कैंब्रिज स्कूल ने आर्मी स्कूल को हराकर ट्रॉफी अपने नाम की |
इस दौरान जेवर विधायक श्री धीरेन्दर सिंह, पूर्व विधायक श्रीमती विमला बाथम, पूर्व राज्य मंत्री नवाब सिंह , डॉक्टर वी एस चौहान , एन पी सिंह, संजय बाली, सुधीर श्रीवास्तव, आनंद मोहन , प्रवीण उपाधयाय, अतुल वर्मा, श्री अंजनी कुमार, ॐ विश्रांति की अध्यक्ष श्रीमती ज्योति सक्सेना, श्री संजीव माथुर, श्री अतुल नागपाल, श्री करुणेश शर्मा, डॉक्टर अखिलेश शर्मा, डॉक्टर एस चौधरी, डॉक्टर सीमा एल कृष्णा, डॉक्टर निशा जैन, डॉक्टर निशा जैन, डॉक्टर अखिलेश शर्मा, श्री रविन्द्रन पी एन, डॉक्टर शिवानी, डॉक्टर विभा चौहान, श्री आज़ाद सिंह, भी मोजूद थे |

भारत की टाॅप रियलिटी शो ‘नं. 1 ड्रामेबाज’ सीजन 3 में दिखेगी नृत्य की अनूठी प्रतिभा

Finally, India’s biggest reality show No.1 Dramebaaz is up with its third season, which showcases the acting & dancing skills of kids and helps them to acknowledge their potential at an early stage. And the special motive behind this show is to promote the talent of Children from Orphanages who also participated in the television reality show. As the details were revealed by the team of No. 1 Dramebaaz, who were present in a press conference held in PVR Plaza, CP, Delhi.
The event was graced by the presence of television actress Kanika Maheshwari, Producer of the show Vijay Bhardwaj, Anil Mittal MD of Satmola, Wahid Ali the MD of Euro Forbes, along with the kids who participated in the show, Sarthak Aggarwal, Nishant, the Orphanage kid and Deep Prabha. They even interacted with media and revealed the uniqueness of their show. The producer of the show Vijay Bhardwaj stated, “The 20% of the seats in the show are reserved for the orphanage kids, as they have no medium to showcase their talents, therefore, we are trying to give them the actual platform and train them in their selective paths.” Talking about the show, he further added, “The 3rd season of the show is judged by Bollywood Actor Prem Chopra, actress Kanika Maheshwari, Vijay Bhardwaj along with dancer Siddhesh Pai. The auditions for the show happened according to the scenario of Digital India, where along with the participants of 16 states of India, International kids also took part which includes California, Singapore, Nepal and many others.”
The overwhelming success of the first & second season of India’s top reality show No.1 Dramebaaz Season 3 is regenerating the audience through heart-warming performances by the kids from 4 yrs to 16 yrs which includes the orphan kids also. And the program telecasts at E24 every Sunday at 8:30 PM.

नई दिल्ली। भारत की सबसे बड़ी टीवी रियलिटी शो ‘नं. 1 ड्रामेबाज’ अपनी तीसरे सीजन के साथ दस्तक देने के लिए तैयार है। यह एक ऐसा रियलिटी शो है, जो बच्चों के अभिनय और नृत्य कौशल को उभारने के साथ उन्हें बेहतर प्लेटफाॅर्म मुहैया कराने का प्रयास करता है और उन्हें प्रारंभिक अवस्था में ही अपनी प्रतिभा और क्षमता को जगजाहिर करने में मदद करता है। खास बात यह कि इस शो के पीछे का विशेष उद्देश्य टीवी रियलिटी शो में भागीदारी कराके अनाथालयों के वंचित बच्चों की प्रतिभा को बढ़ावा देना है। इसी शो के प्रमोशन के लिए ‘नं. 1 ड्रामेबाज’ की टीम ने नई दिल्ली के कनाॅट प्लेस स्थित पीवीआर प्लाजा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में टीवी अभिनेत्री कनिका माहेश्वरी, शो के निर्माता विजय भारद्वाज, सतमोला के एमडी अनिल मित्तल, यूरो फोब्र्स के एमडी वाहिद अली, शो में भाग लेने वाले बच्चों सार्थक अग्रवाल, निशांत के साथ अनाथालय की बच्ची दीप प्रभा भी उपस्थित रही। प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन्होंने मीडिया के साथ भी बातचीत के दौरान शो की विशिष्टताओं का विवरण दिया।
शो के निर्माता विजय भारद्वाज ने कहा, ‘इस शो में 20 फीसदी सीटें अनाथ बच्चों के लिए आरक्षित हैं, क्योंकि उनके पास अपनी प्रतिभा दिखाने का कोई दूसरा माध्यम नहीं है, इसलिए, हम उन्हें वास्तविक मंच देने और उन्हें प्रशिक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।’ शो के बारे में उन्होंने आगे कहा, ‘बॉलीवुड अभिनेता प्रेम चोपड़ा, अभिनेत्री कनिका माहेश्वरी, विजय भारद्वाज और डांसर सिद्धेश पाई के साथ इस शो के तीसरे सीजन का फाॅर्मेट तय किया गया है। डिजिटल इंडिया के परिदृश्य के अनुसार इस शो के लिए ऑडिशन हुआ, जहां भारत के 16 राज्यों के प्रतिभागियों के साथ कैलिफोर्निया, सिंगापुर, नेपाल सहित कई अन्य देशों के बच्चों ने भी भाग लिया।’
भारत की शीर्ष रियलिटी के पहले और दूसरे सीजन की भारी सफलता के बाद ‘नं. 1 ड्रामेबाज’ सीजन-3 भी दर्शकों का दिल जीतने का प्रयास करेगा, जिसमें 4 साल से लेकर 16 साल तक के बच्चे प्रतिभागी होंगे। इन प्रतिभागियों में अनाथ बच्चों को भी शामिल किया गया है। ‘नं. 1 ड्रामेबाज’ का प्रसारण हर रविवार की शाम 8.30 बजे ई-24 चैनल पर होगा।

दीप प्रज्जवलित कर हुई बाराही मेले की शुरूआत

ग्रेटर नोएडा। ऐतिहासिक बाराही मेले का शुभारम्भ दीप प्रज्जवलित करके किया गया। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर में ऐतिहासिक बाराही मेले का आगाज किया गया। मेले के पहले दिन समिति के पदाधिकारियों ने भूमि पूजन व हवन करवाकर मेला प्रारम्भ किया। लगातार कई वर्षो से शिव मंदिर सेवा समिति सूरजपुर के द्वारा यह मेला लगाया जाता है जिसमें भारी संख्या में लोग सरीक होते है। समिति के अध्यक्ष धर्मपाल भाटी ने बताया कि 29 मार्च से लेकर 8 अप्रैल तक यह मेला चलेगा। उन्होंने कहा की सांस्कृतिक मंच पर देश व समाजहित में कार्य कर रही प्रतिभाओं को भी सम्मानित किया जाता है ताकि वें आगे और अच्छे कार्य कर सके। समिति के मंत्री ओमवीर बैसला ने बताया कि मेले का संदेश बेटी बचाओ, बेटी पढाओं व स्वच्छ भारत मिशन हैै इस मिशन के प्रति कार्य करने के लिए लोगो को जागरूक किया जाता है। मीडिया प्रभारी मूलचंद शर्मा ने पत्रकारों का धन्यवाद करते हुए कहा कि सूरजपुर के ऐतिहासिक बाराही मेले को इतनी उचाईयों तक पहुंचाने में मीडिया की अहम भूमिका रही और इसीलिए एनसीआर का ये सबसे बडा मेला माना जाता है। बाराही देवी का पावन दरवार हम सबके लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भारी संख्या में लोगो के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही। कार्यक्रम के पहले दिन एसपी ग्रामीण सुनीति सिंह न अपनी उपसस्थिति दर्ज कराई समिति के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। एसपी ग्रामीण सुनीति सिंह ने इस मेले के आयोजन को लेकर कहा कि पुलिस प्रसाशन की चुस्त दुरूस्त व्यवस्था रहेगी। वही समिति के लोगो ने भी पुलिस प्रसाशन का धन्यवाद किया। इस मौके पर अध्यक्ष धर्मपाल भाटी, ओमवीर बैसला, मूलचन्द शर्मा, लक्ष्मण सिंघल, बिजेंन्द्र सिंह भाटी, जगदीश भाअी, लाला पन्नी, सुभाष शर्मा, राजवीर, भोपाल भाटी श्रीचन्द भाटी, डा0 ईश्वर सिंह आदि लोग मौजूद रहे।

अनसुनी कहानियां जो हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दे

राष्ट्रीय लोकदल के किसान प्रकोष्ठ पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष चौधरी शौकत अली चेची की कलम से कुछ अनसुनी कहानियां जो हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दे 2014 से पहले बीजेपी ने कांग्रेस को घोटाले बाज और भ्रष्टाचार करने वाली सरकार बताया देश की जनता ने दूध की धुली हुई पार्टी समझकर मोदी जी को सत्ता सौंफ दी मगर मोदी जी ने कांग्रेस को सत्ता में बैठने के बाद भी पीछा नहीं छोड़ा और कांग्रेस पर घोटाला करने की एक से बढ़कर एक आरोप प्रत्यारोप लगाकर बाढ़ सी लगा दी देश की जनता ने मोदी जी को एक अच्छा नेता माना कि तरक्की अमन चैन शांति देश में चारों तरफ रोशनी बनकर फैलेगी मगर 2015 के बाद घोटालो के आरोप शुरू हो गए मोदी जी लोकप्रिय होते गए देश की जनता आशा और भावनाओं में बहती रही मगर गौर करने वाली बात है अगर घर के मुखिया का परिवार पर कंट्रोल नहीं या वजूद ने हो तो उस घर का बेडा गर्क हो जाता है इस समय देश की जनता समझ नहीं पा रही क्या गलत क्या सही मगर एक बात सच है नए कानून बेरोजगारी महंगाई जाति धर्म के नाम से नफ़रत गुमराह करने वाली बातो से जनता पूरी तरह से त्रस्त है आगे की कुछ बातों पर रोशनी डालने की जरूरत है 2015 से शुरु चमत्कार मोदी सरकार ललित मोदी 500 करोड़ का घोटाला विजय माल्या 9000 करोड़ का घोटाला नीरव मोदी 11500 करोड का घोटाला तीनो ही विदेश भाग गए 2019 में केंद्र में जो सरकार आएगी इन पैसों की भरपाई के लिए क्या जनता पर बोझ नहीं डालेगी यह बहुत बड़ा सवाल है अब जब भी विपक्ष ने विरोध किया तो मुद्दे को भटकाने के लिए कोई नया प्रूफगडा तैयार कर जनता को भ्रम में डालने की कोशिश की मगर नीरव मोदी पर केंद्र घिरती दिखाई दी तो एक्शन लेना शुरु किया और जनता तथा विपक्ष को शांत करने के लिए 500 करोड़ की संपत्ति जप्त करने का दावा किया समझने वाली बात यह है लगभग एक हप्ते में इतनी संपत्ति कैसे जब्त कर ली अगर हां करेंसी तो नहीं मिली जिसका ब्याज तथा लाभ के लिए करेंसी का होना जरुरी होता है वह पैसा जो जनता का है बैंक में कब आएगा संपत्ति कब नीलाम होगी कितने में नीलाम होगी यह सच्चाई समझनी भी जरूरी है कि लगभग 15 महीने से नोट बंदी का कैलकुलेशन अभी तक नहीं हुआ जो सबसे बड़ा घोटाले की संज्ञा देने का इशारा करता है जिसमें निर्दोष गरीब देश की जनता जान माल की क्षति हुई बेरोजगारी और नफरत की मार पड़ी अलग से 4 साल के मोदी शासन मे लगभग 45 हजार करोड़ का घोटाला सामने आया जिसमें 20 लोगों के नाम आए इससे आगे सभी मिलाकर 85 हजार करोड़ का घोटाला तथा 57 लोगों का नाम बताया जा रहा है मजेदार बात यह है घोटालो में सबसे ज्यादा मोदी नाम के लोगों का बताया जा रहा है एक बात तो सच है जो लोग सत्ता में आ जाते हैं 5 साल में ही उनकी संपत्ति 5 गुनी से भी ज्यादा हो जाती है और उनके करिबीयो की भी हम अगर google पर सर्च करें तो bjp में सबसे ज्यादा घोटाले बताए जा रहे हैं समझ में नहीं आता देश का वोटर किसको सत्ता दे जोकि सबका भला कर सके सबका साथ सबका विकास कहना आसान है मगर नेता सत्ता हत्याने के लिए लुभाने गुमराह करने वाली बातों से देश की जनता को बीच मझधार में खड़ा कर देते हैं मगर जनता भी 5 साल का इंतजार कर गुस्से में आकर हनुमान जी की तरह पूरे पहाड़ को ही उठा लेते हैं जिसका रिजल्ट बाद में अच्छा नहीं मिल पाता है इन सारी बातों में कितनी सच्चाई है यह तो आगे आने वाला समय ही बताएगा सवाल यह भी है हमारे देश मैं नेता से ज्यादा जनता दोषी नजर आती है जो आंख मूंद कर बहुत जल्दी किसी पर भी विश्वास कर लेती है बड़ा लालच तथा गंदा लालच किसी को भी नहीं छोड़ता जिस के देवी देवता औलिया पैगंबर अवतार महापुरुष भी छूते नहीं रहे जिन्होंने सच्चाई को मजबूती देकर बुराई का नाश किया अंत में समझना यह होगा हम सभी देशवासी सच्चाई को गहराई से कब समझेंगे

उपचुनावों के आधार पर लोकसभा चुनाव आंकना भूल होगी


डाँ नीलम महेंद्र
19 मार्च को योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल का एक वर्ष पूर्ण कर रहे है। भारी बहुमत, जनता की अपेक्षाओं और आशीर्वाद के बीच यूपी के मुख्यमंत्री बनने के ठीक एक साल बाद अपने प्रदेश के दो लोकसभा क्षेत्रों के उपचुनाव में इस प्रकार के नतीजों की कल्पना तो योगी आदित्यनाथ और भाजपा तो छोड़िये देश ने भी नहीं की होगी।


वो भी तब जब अपने इस एक साल के कार्यकाल में उन्होंने तमाम विरोधों के बावजूद यूपी के गुंडा राज को खत्म करने और वहाँ की बदहाल कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए एन्काउन्टर पर एन्काउन्टर जारी रखे। यहाँ तक कि एक रिपोर्ट के अनुसार एक बार 48 घंटों में 15 एन्काउन्टर तक किए गए।
वादे के अनुरूप सत्ता में आते ही अवैध बूचड़खाने बन्द कराए। अपनी पहली कैबिनेट मीटिंग में किसानों के ॠण माफी की घोषणा की। लड़कियों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए ऐन्टी रोमियो स्कवैड का गठन किया। अपनी सरकार में वीआईपी कल्चर खत्म करने की दिशा में कदम उठाए । यूपी के पेट्रोल पंपों पर चलने वाले रैकेट का भंडाफोड़ किया। प्रदेश को बिजली की बदहाल स्थिति से काफी हद तक राहत दिलाई। परीक्षाओं में नकल रुकवाने के लिए वो ठोस कदम उठाए कि लगभग दस लाख परीक्षार्थी परीक्षा देने ही नहीं आए। लेकिन इस सब के बावजूद जब उनके अपने ही संसदीय क्षेत्र में उपचुनाव के परिणाम विपरीत आते हैं तो न सिर्फ यह देश भर में चर्चा का विषय बन जाते हैं बल्कि सम्पूर्ण विपक्ष में एक नई ऊर्जा का संचार भी कर देते हैं। शायद इसी ऊर्जा ने चन्द्र बाबू नायडू को राजग से अलग हो कर मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए प्रेरित किया। खास बात यह है कि भाजपा की इस हार ने हर विपक्षी दल को भाजपा से जीतने की कुंजी दिखा दी, “उनकी एकता की कुंजी”।
भाजपा के लिए समय का चक्र बहुत तेजी से घूम रहा है। जहाँ अभी कुछ दिनों पहले ही वाम के गढ़ पूर्वोत्तर के नतीजे भाजपा के लिए खुश होने का मौका लेकर आए, वहीं उत्तरप्रदेश और ख़ास तौर पर गोरखपुर के ताजा नतीजों के अगले कुछ पल उसकी खुशी में कड़वाहट घोल गए। इससे पहले भी भाजपा अपने ही गढ़ राजस्थान और मध्यप्रदेश के उपचुनावों में भी हार का सामना कर चुकी है। सोचने वाली बात यह है कि इस प्रकार के नतीजे क्या संकेत दे रहे हैं?
हालांकि एक या दो क्षेत्रों के उपचुनाव के नतीजों को पूरे देश के राजनैतिक विश्लेषण का आधार नहीं बनाया जा सकता लेकिन फिर भी यह नतीजे कुछ तो कहते ही हैं। कहने को कहा जा सकता है कि भाजपा का पारम्परिक वोटर वोट डालने नहीं गया और इसलिए कम वोटिंग प्रतिशत के कारण भाजपा पराजित हुई लेकिन हार तो हर हाल में हार ही होती है और उसे जीत में बदलने के लिए अपनी हार और अपने विरोधी की जीत दोनों का ही विश्लेषण करना आवश्यक हो जाता है।
उत्तर प्रदेश की ही बात लें। क्या दो लोकसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार की जीत उसकी बढ़ती हुई लोकप्रियता का संकेत है? जी नहीं, खुद अखिलेश इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि उनकी इस जीत में बसपा के वोटबैंक का पूरा योगदान है और वह अकेले अपने दम पर इसे हासिल नहीं कर सकते थे।
दरअसल बात भाजपा प्रत्याशियों के हारने की नहीं उनकी हार में छिपे उस संदेश की है कि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य अपनी छोड़ी सीट इसलिए हार गए क्योंकि वे अपने ही संसदीय क्षेत्र के लोगों का दिल नहीं जीत पाए।
बात समाजवादी पार्टी और बसपा के गठबंधन की जीत की नहीं इस जीत में छिपे उस संदेश की है कि आज भी “जाति की राजनीति” के आगे “भ्रष्टाचार और विकास” कोई मुद्दा नहीं हैं। यह न सिर्फ कटु सत्य है किन्तु दुर्भाग्य भी है कि इस देश में आज भी विकास पर जाति हावी हो जाती है। सत्ता के लालच के लिए जाति और वोट बैंक के गणित के आगे सभी दल अपने आपसी मतभेद, मान अपमान के मुद्दे और दुशमनी तक भुलाकर एक हो जाते हैं। जैसा कि अभी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित करने के लिए लोकसभा में वो सभी दल एक जुट हो गए जो राज्यों में एक दूसरे के प्रतिद्वंद्वी हैं। जैसे आंध्र की वाईएसआर काँग्रेस पार्टी और तेलुगू देसम और पश्चिम बंगाल की तृणमूल काँग्रेस और माकपा।
देश की राजनीति और लोकतंत्र के लिए इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण क्या हो सकता है कि ये सभी विपक्षी दल देश की जनता के सामने देश हित की कोई स्पष्ट नीति अथवा ठोस विचार रखे बिना केवल मात्र स्वयं को एकजुटता के साथ प्रस्तुत करके भी अपने अपने वोट बैंकों के आधार पर आश्चर्य जनक परिणाम प्राप्त कर लेते हैं।
लेकिन वोटिंग प्रतिशत और जाति गत आँकड़ों का विश्लेषण करके सत्ता तक पहुंचने का रास्ता खोजने वाले यह विपक्षी दल चुनावी रणनीति बनाते समय यह भूल जाते हैं कि देश का वोटर आज समझदार हो चुका है। वो उस ग्राउंड रिपोर्टिंग को नजरअंदाज करने की भूल कर रहे हैं कि देश की जनता भाजपा के स्थानीय नेताओं और ढुलमुल रवैये से मायूस है जो इन नतीजों में सामने आ रही है लेकिन “मोदी ब्रांड” पर उसका भरोसा और मोदी नाम का आकर्षण अभी भी कायम है।
आज चुनाव जीतने के लिए वोटर और जातिगत आंकड़ों से ज्यादा महत्वपूर्ण उसका मनोविज्ञान समझना और उससे जुड़ना है। और इसमें कोई दोराय नहीं कि आज भी देश के आम आदमी के मनोविज्ञान और भरोसे पर मोदी ब्रांड की पकड़ बरकरार है। जब बात देश की आती है तो इस देश के आम आदमी के सामने आज भी मोदी का कोई विकल्प नहीं है। इसलिए चुनावी पंडित अगर वोटर के मनोवैज्ञानिक पक्ष को नजरअंदाज करेंगे तो यह उनकी सबसे बड़ी भूल होगी। आगामी लोकसभा चुनावों की बिसात बिछाते समय विपक्ष इस बात को न भूले कि “ये पब्लिक है ये सब जानती है”।