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विचार

अनदेखा घाव है वो जो रह-रह कर रिसता होगा.. डॉ शशि धनगर ©®


कितना दर्द उसके
ज़िगर में पलता होगा
अनदेखा घाव है वो
जो रह-रह कर
रिसता होगा…
कुछ तो खाली है
भीतर तक उसके
जो वर्षों बाद भी
मुखरित होने की ख़लिश है…
यूँ तो चारों तरफ़ उसके
फूलों के बगीचे हैं
कलियों ने भी सजाये
उसके लिए दरीचे हैं…
पर कसक जाती नहीं
उन काटों की चुभन की
रह रह कर उठती है
टीस उस चमन की …
वक़्त बदला है बहुत
खुली हवा में साँस लेने को
तड़प है उसमें कि
वो भी महसूस करे
आज़ाद सी जीने को…
दर्द बाँटने से कम होता है
सुना है बरसों से
यही कारण है कि
उसकी कसक ने उसे
ज़ोर से आवाज़ दी होगी…।
उसके अपने जब
उसके दर्द में शामिल होंगे
भले साथ जमाने के
ढेरों उलाहने होंगे…
कुछ तो उसकी वो
पुरानी चुभन कम होगी
इसी चाहत में उसने
इतिहास की परतें उधेड़ी होंगी…।

जेवर एयरपोर्ट भूमि अधिकरण को यूपी सरकार का तानाशाही रवैया – चौधरी शौकत अली चेची,

ग्रेटर नोएडा 2013 में केंद्र में कांग्रेस की सरकार ने किसानो की सुविधा व लाभ के लिए भूमि अधिग्रहण बिल कानून पास किया जो 1 जनवरी 2014 को लागू हुआ जिसमें राष्ट्रीय लोकदल की मुख्य भूमिका रही। उद्देश्य। 80 परसेंट किसानों की सहमति जरूरी किसानों को अच्छा खासा मुआवजा दिया जाए 1894 भूमि अधिग्रहण को एक दमन कारी कानून करा दिया सैन्य उद्देश्यों के लिए भूमि अधिग्रहण गांवो में ढांचा गत सुविधा योजना संबंधित हैं सस्ती और गरीबी की लाभांवित सुविधा मुख्य हैं बहु फसली और उपजाऊ जमीन का विशेष परिस्थिति में ही

अधिग्रहण ग्रामीण भूमि का मुआवजा बाजार का चार गुणा तथा शहरी जमीन का मुआवजा बाजार का दो गुना 5 साल में प्रोजेक्ट शुरु नहीं हुआ तो किसानो की जमीन वापिस किसी नियम की अनदेखी करने वाले अधिकारी पर कानूनी कार्रवाई इस नियम का विस्तार जम्मू कश्मीर राज्य के अलावा संपूर्ण भारत पर लागू भूमि अधिग्रहण के कारण जीविका खोने वालों को 12 महीने तक प्रति परिवार 3000 रुपए निर्वाह भत्ता अनिवार्य है प्रभावित भूमि हीन परिवार को ग्रामीण क्षेत्र मैं ₹50000 तथा 150 मीटर का मकान बना कर देना शहरी क्षेत्र प्रभावित परिवार को 50 मीटर का मकान बना कर देना विलय संशोधन सुझाव था की जमीन डेवलपर्स को लीज पर दी जाए जमीन का मालिक किसान ही रहे और इससे किसान को सालाना आए भी मिलती रहे यह संशोधन मंजूर कर लिया गया लोकसभा में सितंबर 2011 में बिल पेश किए जाने के बाद अधिग्रहण की गई भूमि के मूल मालिकों को 50 परसेंट मुआवजा दिया जाए 40 परसेंट पर सहमति हुई अनुसूचित जाति जनजाति की जमीन का अधिग्रहण जहां तक संभव है निषेध किया धारा 84 व पचासी में कुछ परिस्थितियां और कृतियों को अपराध बताया झूठी और गलत सूचना फर्जी दस्तावेज पेश कर मुआवजा हासिल करने के लिए गलत काम करने पर सजा दी जा सकती है अनुछेद 254 स्पष्ट करता है कि केंद्र के कानून और राज्य के कानून में असंगती है तो राज्य का कानून केंद्र के विरुद्ध मान्य नहीं होगा राज्य कानून में संशोधन कर सकता है मगर राष्ट्रपति की सहमति के बगैर नहीं अगर राज्य सरकार कानून लाना चाहती है तो प्रभावित वर्ग के प्रति संवेदनशील होना अनिवार्य जिसे यह स्पष्ट हो सके कि राज्य का कानून केंद्र सरकार के कानून से बेहतर है तब इस प्रस्तावित अधिनियम की सार्थकता होगी,, अब जेवर एयरपोर्ट भूमि अधिकरण को यूपी सरकार का तानाशाही रवैया लोकतंत्र की हत्या करार दिया जाए तो गलत नहीं होगा जमीन अधिग्रहण करने से पहले प्रधानी को समाप्त कर अर्बन घोषित कर दिया 2 साल से अर्बन क्षेत्र का रेट नहीं बढ़ाया एयरपोर्ट की विज्ञप्ति पहले जारी कर दी भूमि अधिग्रहण नहीं किया अर्बन क्षेत्र बाद में डिक्लेअर किया जिसमें up सरकार सर्किल रेट का दुगना मुआवजा देने पर किसानो पर दबाव दे रही है जबकि इससे पहले यमुना प्राधिकरण ने पैरीफेरल मैं किसानों को 36 40 रुपए वर्ग मीटर का मुआवजा दिया किसानो की पर्सनल आवादी को आधी करके क्यों दिया जाएगा जबकि हर इंसान परसनल आवादी अपनी जरुरत के हिसाब से रखता है 10 परसेंट एकबार जमीन की आबादी को भी दरकिनार कर दिया किसानों की अन्य सुविधा और जायज मांग तो शायद गुम हो गई 60 परसेंट वोट देकर किसानों ने बीजेपी को सत्ता सौप दी की किसानों का भला होगा जय जवान जय किसान सबका साथ सबका विकास मोदी योगी सरकार में गुम हो गया ऐसा प्रतीत होता है। 2300 रुपए के हिसाब से मुआवजा देना कहां तक उचित है bjp सरकार में किसानो की जायज मांग जो आंदोलन हो रहे हैं उनको लगातार कुचला जा रहा है योगी सरकार में गुमराह और नफरत भली भाति फल फूल रहे हैं सरकारो की जिम्मेदारी बनती है सबके साथ न्याय और इंसाफ करें

हमारा देश अनेकों तरह के गुलदस्ते जैसा है जिसे हम सभी को समझने की जरूरत है – किसान नेता चौधरी शौकत अली चेची

किसान नेता चौधरी शौकत अली चेची की कलम से आज की गुमराह व नफरत वाली राजनीति गतिविधियां पर कुछ पंक्तियां जो सभी देशवासियों को सोचने पर मजबूर करती है 2017 चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी में अंतर कलह किसका फायदा हुआ और किस का नुकसान हुआ किसने मोहरा बनकर इस प्रक्रिया को अनजान तक पहुंचाया कुछ जानकार लोग ही भली भाति जानते हैं 2019 चुनाव से पहले उसी प्रक्रिया को बनाने की शायद कोशिश की जा रही है अमर सिंह जी तथा शिवपाल यादव के लिए पार्टी के अंदर से ही विरोध की आवाज पहले से ही निकलती आ रही है हर इंसान चाहता है कि लोकप्रियता और पावर मेरे पास रहे लोकप्रियता को हासिल करने के लिए वह कुछ भी करने को उतारु हो जाता है वह सहनशीलता मान मर्यादा इंसानियत भाईचारा सामाजिक प्रतिष्ठा सबको ताक पर रख देता है शिवपाल यादव ने समाजवादी सेकुलरिज्म की स्थापना करना कोई बुराई नहीं समझना यह है इसका मुख्य उद्देश्य क्या है अमर सिंह जी का आजमन के लिए आक्रमक होकर विरोध करना आजम जी की पिछली कही हुई बातों पर सिंह जी जिन बातों को लेकर विरोध कर रहे हैं इनमें तथा आजम खान की बातों में जमीन आसमान का अंतर है आजम जी के चुनाव क्षेत्र में जाकर चैलेंज करना गुमराह और नफरत दोनों बातों को लागू करता है कानून और संविधान का उल्लंघन न हो हमारे देश का नागरिक देश के किसी भी कोने में जाकर रह सकता है

व्यवसाय या राजनीति कर चुनाव लड़ सकता है समझना यह है इस तरह की बातों से इंसान लोकप्रिय बनने की चेष्टा करता है या यूं कहें महा गठबंधन से 2019 चुनाव bjp को हार दिखाई दे रही है इस वजह से जाति धर्म को सामने खड़ा कर वोटों का बटवारा कर अपने पक्ष में लाया जाए bjp में मुस्लिम कद्दावर नेता हैं आजम खान ही के सामने उन्हें खडा करने की जरुरत है सवाल यह है आजम खान अमर सिंह दोनों में रंजिश पैदा हो जाए धर्म के नाम से जनता मे उबाल आज आए evm मशीन तथा मीडिया व bjp की नाकामियो पर पर्दा डल जाए वैसे तो हर समाज में सरफिरे होते हैं मगर इस बार देश की जनता जागरुक नजर आ रही है और वह समझ रही है दर्द उसी को होता है जिसे चोट लगती है इन बातों में कितना दम है यह कहना मुश्किल है अगर किसी सज्जन को इन बातों में आपत्ति है तो मुझे कोई गुरु नहीं और मैं यही कहूंगा हम सभी एक दूसरे के सहारे हैं हमारे देश की राजनीति ज्यादातर इस समय गुमराह और नफरत पर चल रही है जाति धर्म हम सभी देशवासियों की पहचान है देश आजाद कराने के लिए हमारे पूर्वजों ने नारा दिया था हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई हम आपस में भाई-भाई देश आजाद हो गया मगर आपसी फूट ने देश को दो टुकड़े मैं बांट दिया अंत में यही कहूंगा 24 घंटे साथ रहने वाले आपसी फूट से पति पत्नी अलग मां बाप से औलाद अलग भाई से भाई अलग परिवार से परिवार अलग मोहल्ले से मोहल्ले अलग बाकी तो बहुत दूर की बात है विचारों की समस्या बातचीत व सूझ-बूझ से हल की जा सकती है यही भारत की संस्कृति है हमारा देश अनेकों तरह के गुलदस्ते जैसा है जिसे हम सभी को समझने की जरूरत है

आंदोलनकारियो की गिरफ्तारी दुर्भाग्यपूर्ण ही नहीं बल्कि शर्मनाक भी है – चौधरी शौकत अली चेची

गौतम बुद्ध नगर औद्योगिक इकाई samsung कंपनी पर शिक्षित और काबिल बेरोजगार युवकों के लिए जायज मांग यानी कंपनी में काबलियत के आधार से नौकरी मिले प्रशासन को जानकारी देकर शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे किसान बेरोजगार सामाजिक संगठन व राजनीतिक कार्यकर्ता वकील प्रदेश सरकार व केंद्र सरकार व सेमसंग कंपनी के इशारे से आंदोलनकारियो को प्रशासन ने जेल में डाल दिया कुछ ऐसा प्रतीत होता है bjp सरकार में अपनी जायज़ मांगों को उठाना ही लोकतंत्र की हत्या है जिस प्रशासन ने निर्दोष लोगों की आवाज को दबाने के लिए यह कदम उठाया है

क्या उन्होंने एक क्षण भी नहीं सोचा होगा कि सरकारी मुलाजिम बनने से पहले उन्होंने क्या-क्या प्रयास नहीं किए होंगे तथा अपनी काबिलियत हासिल करने के लिए पढाई में डिग्रियां हासिल से खर्च और परेशानियां का इतना सामना करना पड़ा होगा प्रशासन को पावर लालच में गुलामी करना कहां तक जायज है बाहरी लोगों को नौकरी देना किसी लालच या दबाब का इशारा करता है bjp सरकार में बेरोजगारी बढी है इसमें कोई दो राय नहीं वादा किया था हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगार देना देश में रोज धरने प्रदर्शन आंदोलन आगजनी तोड़फोड़ इन सब में इजाफा होता जा रहा है जो सबसे बड़ा कारण है बेरोजगारी गौतम बुद्ध नगर की जनता ने अच्छे दिन के वास्ते सांसद और तीनों विधायकों को bjp की झोली में डाल दिया जब भी कोई आंदोलनकारी अपनी जायज मांग को उठाता है bjp सरकार न जाने क्यों उन्हें जेल में डाल देती हैं आजाद भारत में हम वास कर रहे हैं या दुबारा से अंग्रेजी शासन की शुरुआत हो गई है यह समझना बड़ा कठिन है भ्रष्टाचार चरम सीमा पर नजर आ रहा है ऐसा प्रतीत होता है सही को गलत और गलत को सही दिखाने का प्रयास किया जा रहा है सेमसंग कंपनी को यह नहीं भूलना चाहिए कि पड़ोसी ही पड़ोसी के काम आता है यहां औद्योगिक इकाई है प्राधिकरण ने यहां की जमीन को एकवार करके किसान को बेरोजगार तो कर दिया है मगर वादा यह भी है किसानों के लिए नौकरी पढाई आदि में 50 परसेंट की भागीदारी रहेगी लेकिन सब उल्टा हो रहा है क्या सरकार या यहां के जनता के चुने हुए प्रतिनिधि या प्राधिकरण या पुलिस प्रशासन चाहता है कि यहां का बेरोजगार क्राइम की तरफ जाए समाज में द्वेष भावना फैले आगे आने वाली पीढ़ी को बेरोजगारी की वजह से नर्क बना दे सभी सज्जनों से अपील करता हूं दर्द उसी के होता है जिसे चोट लगती है आज के समय में बगैर पैसे कुछ भी नहीं बेरोजगार इंसान भूल जाता है क्या गलत क्या सही जरुरत पड़ने पर पैसा कमाने के लिए किसी भी रास्ते पर चला जाता जो संविधान समाज इंसानियत मान मर्यादा सहनशीलता इन सबके लिए घातक है आरोप लगाना बहुत आसान होता है सही रास्ते पर चलना बड़ा कठिन होता है हम गौतम बुद्ध नगर वासी भारत देश के नागरिक हैं हमें सरकारी प्रशासन से हमदर्दी नहीं चाहिए अधिकार चाहिए इंसाफ चाहिए बल्कि मैं तो यह कहूंगा सभी विपक्षी पार्टी सामाजिक संगठन अपने बच्चों और समाज के लिए आने वाली पीढ़ी के लिए एक जुट होकर एक साथ खड़ा होने की जरुरत हे सरकार या समाज या प्रशासन को यह नहीं भूलना चाहिए पड़ोसी के घर में अगर आटा है दाल है या और कोई वस्तु है जिसे वह एक दूसरे के सहयोगी बनकर उधारी में ज़रूरत की पूर्ति कर सकता है मगर जब कुछ होगा ही नहीं कोई से पड़ोसी के पास तो अनजान आदमी उसको देगा नहीं फिर वह चुराने और छीनने की कोशिश करेगा यह कड़वी सच्चाई है इसे दरकिनार नहीं किया जा सकता आजादी हम उसे कह सकते हैं जहां इंसाफ हो जहां किसी का भी जायज हक मिले किसी के साथ में नाइंसाफी ना हो किसी पर अत्याचार ना हो मगर ऐसा प्रतीत होता है कि यहां तो सब कुछ हो रहा है और इस समाप्त करने के लिए एक दूसरे के सहयोगी बनने की जरूरत है जो इंसाफ और जायज बात पर विश्वास करता हो bjp सरकार में हक छीन ना ही पड़ता है इस सरकार में ऐसा प्रतीत होता है केवल गुमराह और नफरत की राजनीति अपने फायदे के लिए कर रही है अगर मेरी इन बातों से किसी सज्जन को आपत्ति है तो मैं इस देश का एक नागरिक हूं किसी की नाराजगी से मुझे कोई आपत्ति नहीं हमारे देश का मजबूत संविधान है इसका इमानदारी के साथ पालन करना हम सभी की जिम्मेदारी है प्रदेश सरकार व प्रशासन संज्ञान में लाए आंदोलनकारी निर्देश लोग जो जेल में हैं उनकी बहने राखी लेकर बैठी हैं सभी देशवासियों को बहन भाई के पवित्र त्यौहार रक्षाबंधन के उपलक्ष में दिल की गहराइयों से हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं

इस्लामिक शब्द कुछ सज्जनों की समझ से परे है-किसान नेता चौधरी शौकत अली चेची

ईद उल जुहा पवित्र त्योहार मनाने का मुख्य उद्देश्य क्या है जिनको सौ प्रतिशत सही नहीं कहा जा सकता इस्लामिक शब्द कुछ सज्जनों की समझ से परे है इस्लामिक महीना दुआ अल हिज जा, 8 ,9,10, तारीख को कुर्बानी ईद-उल-जुहा कहा जाता है हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के जमाने से यह परंपरा चली आ रही है 195 वर्ष के हो कर नबी दुनिया छोड़ गए हजरत इस्माइल अलैहिस्सलाम 137 वर्ष के हो कर दुनिया छोड़ गए हजरत इब्राहीम को खुदा के यहां से हुकुम हुआ बंदे कुर्बानी दे बहुत सारे जानवरों को अल्लाह के रास्ते में जीभह कर दिया लेकिन कुर्बानी मंजूर नहीं हुई अंत में हुकुम हुआ बंदे जो तुझे दुनिया में सबसे प्यारी चीज है उस की कुर्बानी दे नबी के बेटे हजरत इस्माइल अलैहिस्सलाम कि उस समय उम्र 11 वर्ष थी सऊदी अरब मक्का के नजदीक मीना के एक पहाड़ पर ले जाते समय शैतान ने नवी को बहका ने की तीन बार अलग-अलग रुप में कोशिश की नवी ने तीनों बार कंकरिया मारकर भगा दिया उसी परंपरा के अनुसार हुजाजे इकराम यानी हाजी शैतान को कंकरिया मारते हैं पहाड़ पर पहुंचकर बेटे इस्माइल ने कहा अब्बा हुजूर हो सकता है आप मेरी सूरत को देखकर छुरी नहीं चला पाएं अपनी आंखों से पट्टी बांध लें और मेरे हाथ पैर बांध दे यह सब करने के बाद नबी ने कहा ला इलाहा इल्ला हूं अकबर बेटे ने कहा अल्लाह हू अकबर वल लिलिहील हमद तो फरिश्तों ने जमीन से लेकर आसमान तक अल्लाह हु अकबर अल्लाह हु अकबर पुकारा खुदा का हुकुम हुआ बेटे को छुरी के नीचे से हटाया फरिश्तों ने दुंबा को छुरी के नीचे दे दिया कुर्बानी मंजूर हो कई हजार सालों से यह त्यौहार उसी उद्देश्य से मनाया जाता है हदीस में फर्ज वाजिब कुर्बानी को मुख्य दर्शाया गया है फर्ज का अर्थ है हर हाल में करना जरुरी है वाजिब का अर्थ है किसी की भावनाओं की कद्र करते हुए उसमें फेरबदल करना जरुरी है कुर्बानी का अर्थ है त्याग सम्मान परंपरा त्याग का अर्थ किसी वस्तु या जानवर को बड़े प्यार सहनशीलता से खर्च कर इत्मिनान के साथ जिसमें मोह ममता दूर होने का दर्द छुपा हो उस मालिक के नाम पर कुर्बान कर देना सम्मान का अर्थ अल्लाह के नाम पर किसी वस्तु या स्थान को इस्तेमाल करने पर किसी की आपत्ति पर उसका ध्यान रखना जरुरी है परंपरा का अर्थ इंसान की अपनी इच्छा के अनुसार कुछ करना जो इस्तेमाल में लाया जाये ना कि किसी दबाव के अनुसार अगर मेरी जानकारी में किसी भी तरह की गलतियां हैं तो मुझे किसी से कोई भी गुरेज नहीं इस्लाम धर्म के त्यौहार जहां खुशियां के प्रतीक होते हैं वही यह भाईचारे को बढ़ावा देते हैं इस धर्म में हर साल दो ईद मनाई जाती हैं एक ईद उल फितर और दूसरी ईद-उल-जुहा यानी बकरीद पर मुस्लिम लोग बकरे की कुर्बानी देते हैं बकरी ईद 70 दिन बाद आती है बकरीद के दिन मुसलमान बकरे भैंसा ऊंट की भी कुर्बानी देते हैं ज्यादातर लोग बकरी ईद पर बकरे की कुर्बानी ही देते हैं इसलिए इसे कुर्बानी की ईद कहते हैं बकरी ईद से कुछ दिन पहले ही बकरे को खरीद कर अपने घर ले आते हैं उसे पालते हैं और फिर बकरी ईद वाले दिन उसे जिभा यानी कुर्बान करते हैं फिर उसको अपने परिचित सगे संबंधियों को बांट दिया जाता है ईद उल फितर त्यौहार में एक महीने के रमजान रख ईद मनाई जाती है तथा अपनी इनकम के अनुसार छितरा यानी दान जरुरतमंद को किया जाता है या किसी भी पुण्य के साथ जोड़ा जाता है इस्लाम के मुताबिक अल्लाह ने हजरत इब्राहीम की परीक्षा लेने के लिए उन्हें अपनी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी देने का हुकुम दिया था

हजरत इब्राहीम को लगा कि उन्हें सबसे प्यारा तो बेटा है इसलिए उन्होंने अपने बेटे की बलि देने का फैसला किया हजरत इब्राहीम को लगा की कुर्बानी देते समय उनकी भावनाएं आड़े आ सकती हैं इसलिए उन्होंने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली थी लेकिन जब कुर्बानी देने के बाद उन्होंने अपनी आंखों पर से पट्टी हटाई तो बेटे को जिंदा देखा उन्होंने देखा कि बेटे की जगह दुंबा जो सऊदी अरब में पाए जाने वाला भेड़ जैसा जानवर है तभी से इस परंपरा को त्योहार के रूप में

इस्लाम धर्म के मानने वाले सभी मनाते चले आ रहे हैं अंत में सभी देशवासियों से ईद उल जुहा की दिल की गहराइयों से हार्दिक बधाई और संदेश हम सभी देशवासी एक दूसरे की भावनाओं की कदर करते हुए सभी त्यौहारों को सहनशीलता इंसानियत मान मर्यादा के रूप में सभी का सम्मान कर आगे बढ़े और देश में अमन चैन तरक्की भाईचारे का संदेश दें

जाने क्यों अब मैं…-डॉ शशि धनगर ©

एक एक लब्ज़ तेरा
गज़ल सरीखा लगता है…
पर जाने क्यों अब मैं
इरशाद नही करती ।

दिल धड़क सा जाता है
तेरे नाम से अब भी
ये और बात है कि मैं
इज़हार नही करती ।

दिन महीने साल क्या
पल भी उंगलियों पर हैं
किसने कहा तुझे कि
मैं इंतज़ार नहीं करती ।

कोई समाया ही नहीं
इस क़दर आंखों में
क्यों महसूस हुआ तुझे कि
मैं इक़रार नहीं करती ।