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कुछ ख़्वाब कुछ हसरतें” का लोकार्पण


नई दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे ‘विश्व पुस्तक मेले’ में 11जनवरी 2019 को हॉल न. 12ए में स्टॉल न. 304 पर ‘बोधि प्रकाशन’ के पुस्तक स्टॉल डॉ शशि धनगर के काव्य संग्रह “कुछ ख़्वाब कुछ हसरतें” का लोकार्पण सम्पन्न हुआ।इस कार्यक्रम के पुरोधा स्वयं ख्यातिप्राप्त साहित्यकार ‘माया

रहे और मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार ‘नवनीत पांडेय’ थे। प्रख्यात लेखक ‘संजय शेफ़र्ड’ की उपस्तिथि महत्वपूर्ण रही। इस अवसर पर अनेक व्यक्ति भी उपस्थित थे

अब तो देवताओं की भी खैर नहीं पड़ोसी मुल्कों का नाम लेकर संसार में उन्हें लोकप्रिय बना दिया -चौधरी शौकत अली चेची,,


चौधरी शौकत अली चेची,,
यूपी 2019 लोकसभा चुनाव सपा बसपा व कांग्रेश व बीजेपी 3 पार्ट बनकर लड़ेंगे इस बात में सच्चाई है तो हम सभी को विचार करना लाजमी होता है किसको फायदा किसको नुकसान संघर्ष करते करते इंसान उम्मीद पर जंग हार जाता है कई सारे सबूत प्वाइंट इकट्ठा कर वकील किसी का केस जिता देता है इतिहास गवाह है पिछले चुनावों पर नजर डालें तो 2014 चुनाव सुनामी था 2017 चुनाव अयोध्या मुद्दा ईवीएम मशीन मीडिया बीजेपी के लिए संजीवनी बनी गोरखपुर फूलपुर कैराना उपचुनाव ने बीजेपी की लोकप्रियता को कमजोर कर दिया मगर हार जीत का अंतर बहुत कम ही रहा मीडिया में बहस के नाम पर चल रहे प्रोग्राम ओं से जनता परेशान है जो नफरत व गुमराह के सिवा कुछ नजर नहीं आता जनता चाहती है अमन चैन तरक्की भाईचारा एक दूसरे का सम्मान बड़े-बड़े वादों से विश्वास उठ चुका है तथा पिछले समय की तरफ लौटने का इशारा दे रही है चुनाव जीतने के लिए जनता के बीच जंग जैसा माहौल बनाया जाता है जो शब्दों के माध्यम से बाण व बमब से कम नहीं होते अब तो देवताओं की भी खैर नहीं पड़ोसी मुल्कों का नाम लेकर संसार में उन्हें लोकप्रिय बना दिया जनता ऐसे शब्दों से नाराज दिखाई दे रही है कुछ चंद लोग पहले से भी और आगे भी रहेंगे जिनको तालिया बजाने शोर मचाने तथा चर्चा करने में अपना समझने वाले नेता की तारीफ करते हैं ऐसे लोग सच्चाई यों से कोसों दूर रहते हैं 2019 चुनाव यूपी का तीन मूर्ति की बात करते हैं अगले पल का पता नहीं क्या होगा मगर विचार करने में कोई बुराई नहीं अपने फायदे के लिए हर कोई ताका झांकी करता है 5 का 10 बनाने की कोशिश करता है बीजेपी या मोदी जी की लोकप्रियता कम हुई है तथा कांग्रेश या राहुल गांधी जी की लोकप्रियता बढ़ गई है कुछ लोग इस समय राहुल गांधी जी व मोदी जी को बराबर मानकर चल रहे हैं आगे चलकर किसकी लोकप्रियता कम होगी यह तो समय ही बताएगा अब सवाल यह है कि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी,, अपना दल,, निषाद,, पीस,, आरएलडी ,,जनसत्ता ,,आदि तथा यूपी में कई सारे मजबूत सामाजिक संगठन हैं और कई सारे मजबूत किसान संगठन हैं इन सभी का सहारा लेने में कांग्रेश कोई परहेज नहीं करेगी 3 राज्यों में कांग्रेस ने किसानों का कर्जा माफ कर खुद को संजीवनी प्राप्त कर ली है यूपी में कांग्रेस को खोने के लिए कुछ नहीं मगर सपा बसपा बीजेपी तीनों पार्टियों की उम्मीद पर पानी जरूर फेर सकती है 29 साल से सत्ता से बाहर कांग्रेस बीजेपी सपा बसपा के कार्यकाल में हुए जघन्य अपराध तथा आगजनी तोड़फोड़ बलवा में निर्दोष लोगों की गई जान तथा बिना वजह के कानूनी शिकंजे में फंसे लोग इन सभी बातों को ताजा करने में कांग्रेश कोई कसर नहीं छोड़ेगी जिसका लाभ कांग्रेश को मिलना लाजिमी है बीजेपी ने बनाए उल्लू जुलूल कानून कांग्रेश को ऊर्जा देंगे कांग्रेस सपा बसपा के साथ या अलग चुनाव लड़े दोनों तरफ कांग्रेश ही फायदे में दिखाई दे रही है बीजेपी ने किसको क्यों डराया या सपा बसपा ने कांग्रेस से क्यों दामन छुड़ाया इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है पर समझना जरूरी है मुस्लिम व एस सी वोटर 2014 व 2017 में किस तरफ थे लोग कहते हैं नेताओं का कोई जमीर नहीं इसलिए यह बात वोटरों पर भी लागू होती है समय बलवान तो गधा भी पहलवान इस दोहा को दरकिनार नहीं किया जा सकता आगे आने वाला समय क्या गुल खिलाएगा बीजेपी मंदिर मुद्दे को खूब जोर से गर्म करेगी जनता का समझना होगा भावनाओं में बहेगी या भाईचारा अमन चैन तरक्की की तरफ अपना ध्यान आकर्षित करेगी अंत में यही कहूंगा हर देश का नागरिक अपने विचारों को रखता है उस पर कौन कितना अमल करता है सबकी अपनी सोच होती है हमारा भारत देश एक है संविधान एक है हम सब एक हैं समझ कर चलें पार्टियों की सत्ता आती जाती रहती है जय हिंद जय भारत वासी नहीं है यह बात जरा सी,,

किसान अपनी जायज़ मांगों को लेकर आंदोलन करने व आत्महत्या करने पर क्यों हो रहा है मजबूर किसान अपनी जायज़ मांगों को लेकर आंदोलन करने व आत्महत्या करने पर क्यों हो रहा है मजबूर – शौकत अली चेची किसान नेता

ग्रेटर नोएडा (फेस वार्ता) हमारे देश का किसान अपनी जायज़ मांगों को लेकर आंदोलन करने व आत्महत्या करने पर क्यों हो रहा है मजबूर अपने दर्द को लेकर सोता और जागता है सरकारे तथा जानकार लोगों को समझने की जरूरत क्यों नहीं होनी चाहिए दर्द उसी के होता है जिसे चोट लगती है हमारे देश का किसान सहनशील आशावादी मान मर्यादा इंसानियत वादी ईमानदार और मेहनती है

जोें की सबसे ज्यादा पुण्य का काम करता है देश की 70 परसेंट अर्थव्यवस्था को संभाले हुए हैं यह आकड़े 95 पर्सेंट सही माने जाएं इसमें संकोच की गुंजाइश नहीं 20/5/2013 से 20/5/2014 तक डीजल 50.72 रू ली बीज खरीद 1121 वैरायटी धान 55 रुपए किलो धान की रोपाई एक बीघे ₹300 खरपतवार नाशक दवाई 350 एक लीटर एक बैग यूरिया 50 किलो का 305 रुपए डीएपी एक बैग 50 किलो का ₹930 ट्यूबवेल का पर मंथ रेट ₹450 एक मजदूर ₹200 ट्रैक्टर बेयरिंग ₹250 आयल 1 लीटर ₹90 एक किलो गिरीश ₹90 ट्रैक्टर सर्विस 15 00 रुपए कंबाइन मशीन की कटाई 1600 रुपए किला हाथ से एक बीघे कटाई ₹620 धान बेची किसान ने ₹45 किलो,,, गेहूं का 1 किलो बीज ₹22 खरपतवार नाशक दवाई 1 लीटर ₹320 खरपतवार नाशक दवाई की एक बिगे स्प्रे ₹40 कंबाइन मशीन की कटाई एक किला 12 00 रुपए हाथ की कटाई एक बीघे 30 किलो गेहूं मंडी बेचा गेहूं किसान ने 1 किलो ₹13 ,,20/5/2018 से 2/12/2018 तक डीजल 72.29 रुपए लीटर एक किलो बीज खरीदा 1121 वैरायटी धान का ₹75 एक बीघे धान की रोपाई ₹500 खरपतवार नाशक दवाई ₹450 यूरिया एक बैग 45 किलो का ₹300 डीएपी 50 किलो का एक बैग 1400रुपए ट्यूबवेल पर मंथ रेंट 1490 रुपए हाथ की कटाई एक बीघे की 1100रुपए कंबाइन मशीन की कटाई एक किला ₹2200 एक मजदूरी ₹400 एक बैरिंग ट्रैक्टर ₹350 गिरीश 1 किलो ₹140 आयल 1 लीटर ₹130 ट्रैक्टर सर्विस 2500 रुपए,, गेहूं का 1 किलो बीज ₹28 खरपतवार नाशक दवाई 1 किलो ₹480 खरपतवार नाशक स्प्रे एक किला ₹300 कंबाइन मशीन से गेहूं एक किला की कटाई का अनुमान 1600 रुपए हाथ की कटाई गेहूं की एक बीघे का अनुमान 50 किलो गेहूं किसान अपना गेहूं बेचेगा मंडी में अनुमान ₹16 किलो,,, अगर 5 साल का रेशों बारीकी से निकाला जाए तो मोदी सरकार में किसानों पर लगभग 30 परसेंट का भार पड़ा और लाभ दिया किसानों को लगभग 9 परसेंट किसान को नुकसान हुआ 21 परसेंट अगर हम 50 दशक पीछे जाएं तो गेहूं 1 किलो ₹2 50 पैसे धान लगभग 1 किलो ₹3 50 पैसे डीजल लगभग 1 लीटर ₹2 25 पैसे मजदूरी लगभग ₹3 यूरिया लगभग एक बैग ₹5 डीएपी एक बैग लगभग ₹10 उस दशक में किसान यूरिया और डीएपी को अहमियत नहीं देता था,, सरकारी मुलाजिमों की सैलरी लगभग ₹5 पर डे तथा विधायक की सैलरी पर मंथ ₹500 व सांसद की सैलरी पर मंथ ₹1000 अब समझने की जरूरत यह है 50 दशक पहले से अब तक किसानों के माल की कीमत में कितने प्रतिशत की वृद्धि हुई तथा सरकारी मुलाजिमों और नेताओं तथा किसानों से संबंधित जो प्रोडक्ट या सामान नहीं है उन पर कितने प्रतिशत वृद्धि हुई जहां तक मेरा मानना है किसानों के माल का अगर रेशों निकाला जाए तो लगभग 25 परसेंट की वृद्धि दिखाई देती है मगर दूसरों की वृद्धि लगभग 500 परसेंट तक दिखाई दे रही है हमारे देश का किसान अपना हक कानूनी तौर पर मांग रहा है सरकार बदलने में किसान का मुख्य योगदान है सरहदों की रक्षा करने में किसानों का मुख्य योगदान है किसानों के जायज हक को मारना सबसे बड़ा पाप है जो एक हिटलर शाही संज्ञा देता दिखाई दे रहा है सरकारें या अन्य जानकार लोग इन बातों पर कितना अमल करते हैं यह तो आगे आने वाला समय ही बताएगा मगर यह सच है इस समय हमारे देश का किसान महंगाई तथा गरीबी से आहत होकर अपना हक मांग रहा है किसान को यह अंदाजा अब है ₹5 किलो किसान के माल को खरीदकर ₹30 किलो बाजार में बेचा जा रहा है किसानों को भी समझने की जरूरत है जाति और धर्म में या भावनाओं में बहने से भला नहीं होने वाला हक मांगना संविधान के खिलाफ नहीं किसी धर्म के खिलाफ नहीं बंधी हुई झाड़ू हमेशा सफाई करती है एकता ने पहाड़ों को भी हिला दिया यह कड़वी सच्चाई है

माननीय सुप्रीम कोर्ट में फिर से विचार होना चाहिए या केंद्र सरकार बिल्ल लाकर कानून में संशोधन करके आम जनता को राहत दे- किसान नेता शौकत अली चेची

किसान नेता चौधरी शौकत अली चेची के कुछ विचार 10 साल पुरानी डीजल गाड़ी 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ी पर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह से बैन लगा दिया माननीय सुप्रीम कोर्ट का फैसला सर्वोपरि है मगर आम जनता को भारी नुकसान चुकाना पड़ेगा इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता माननीय सुप्रीम कोर्ट में फिर से विचार होना चाहिए या केंद्र सरकार बिल्ल लाकर कानून में संशोधन करके आम जनता को राहत दे

ताकि देश की जनता को बड़े नुकसान से बचाया जा सके इस समय देश की जनता महंगाई और बेरोजगारी से त्रस्त है बहुत सारे लोग पुरानी गाड़ियों से अपने परिवार का पालन कर अपनी जीविका चला रहे हैं तथा कुछ लोग अपनी एमरजेंसी के लिए हैसियत के हिसाब से पुरानी गाड़ियों को खरीद कर रखा है उन गाड़ियों में फिटनेस और क्वालिटी की कमी नहीं एक लाख से लेकर पांच लाख किलोमीटर तक चलने की इंजन की वारंटी होती है 10 साल व 15 साल पुरानी गाड़ियों की जनसंख्या देश में काफी है जो दो लाख किलोमीटर भी नहीं चली सकी है उन लोगों की हैसियत नहीं कि वह नई गाड़ी खरीद सके जरुरत के हिसाब से गाड़ी रखने वाला व्यक्ति इस आपातकालीन स्थिति को किस तरह संभाल पाएगा इस पर भी गौर करने की जरुरत है ऐसा भी नहीं है कि पुरानी गाड़ियों से पोलूशन ज्यादा या हादसे ज्यादा होते हैं इन दोनों बातों का जिम्मेदार इंसान की सूज बूझ का असर होता है पुरानी गाड़ियों की फिटनेस व कंडीशन के हिसाब से एक्सपायर डेट को आगे बढ़ाया जा सकता है ताकि आम जन का कम से कम नुकसान हो सके पोलूशन और हादसों को कम करने के लिए पुरानी गाड़ियों को बैन करने से समस्या का समाधान नजर नहीं आता गाड़ी की फिटनेस तथा कंडीशन व सड़कों पर भीड़ को कम किया जाए जिस के अनेक उपाय हो सकते हैं कानून ही सब कुछ है तो कानून बनाने का तरीका भी शुभम होना चाहिए जो लाभ हानि दोनों का संतुलन बना कर रख सके केंद्र सरकार की मुख्य जिम्मेदारी बनती है इस कानून मैं संशोधन कर जनता को लाभ दे घर परिवार में कोई भी बीमार हो सकता है खासकर बुजुर्ग उनको रिजेक्ट नहीं किया जाता डॉ दवाइयों के माध्यम से ठीक किया जाता है पुरानी गाड़ियों भी घर के मुखिया की तरह कमा कर देती है तथा परिवार की परवरिश में मुख्य योगदान होता है तथा कुछ लोगों का गाड़ियों से मुख्य लगाव होता है कुछ लोगों का तर्क है विदेशों में पुरानी गाड़ियों को नष्ट कर दिया जाता है समझना यह है विदेशों में क्या-क्या होता है हम उनकी कितनी नीतियों को अमल में लाकर आगे बढ़ रहे हैं और तरक्की कर रहे हैं हमारे देश को कुछ नया करना चाहिए सभी की भलाई के लिए जिसमें नुकसान कम लाभ ज्यादा मिले तथा विदेशों में हमारी नीतियों की प्रसंसा हो यह जिम्मेदारी सभी नेताओं की बनती है अतः मैं यही कहूंगा मेरे विचारों से अगर किसी सज्जन को आपत्ति है तो मैं छमा का पात्र हूं और अपनी बात कहने का अधिकार हम सभी देशवासियों को है

अनदेखा घाव है वो जो रह-रह कर रिसता होगा.. डॉ शशि धनगर ©®


कितना दर्द उसके
ज़िगर में पलता होगा
अनदेखा घाव है वो
जो रह-रह कर
रिसता होगा…
कुछ तो खाली है
भीतर तक उसके
जो वर्षों बाद भी
मुखरित होने की ख़लिश है…
यूँ तो चारों तरफ़ उसके
फूलों के बगीचे हैं
कलियों ने भी सजाये
उसके लिए दरीचे हैं…
पर कसक जाती नहीं
उन काटों की चुभन की
रह रह कर उठती है
टीस उस चमन की …
वक़्त बदला है बहुत
खुली हवा में साँस लेने को
तड़प है उसमें कि
वो भी महसूस करे
आज़ाद सी जीने को…
दर्द बाँटने से कम होता है
सुना है बरसों से
यही कारण है कि
उसकी कसक ने उसे
ज़ोर से आवाज़ दी होगी…।
उसके अपने जब
उसके दर्द में शामिल होंगे
भले साथ जमाने के
ढेरों उलाहने होंगे…
कुछ तो उसकी वो
पुरानी चुभन कम होगी
इसी चाहत में उसने
इतिहास की परतें उधेड़ी होंगी…।

जेवर एयरपोर्ट भूमि अधिकरण को यूपी सरकार का तानाशाही रवैया – चौधरी शौकत अली चेची,

ग्रेटर नोएडा 2013 में केंद्र में कांग्रेस की सरकार ने किसानो की सुविधा व लाभ के लिए भूमि अधिग्रहण बिल कानून पास किया जो 1 जनवरी 2014 को लागू हुआ जिसमें राष्ट्रीय लोकदल की मुख्य भूमिका रही। उद्देश्य। 80 परसेंट किसानों की सहमति जरूरी किसानों को अच्छा खासा मुआवजा दिया जाए 1894 भूमि अधिग्रहण को एक दमन कारी कानून करा दिया सैन्य उद्देश्यों के लिए भूमि अधिग्रहण गांवो में ढांचा गत सुविधा योजना संबंधित हैं सस्ती और गरीबी की लाभांवित सुविधा मुख्य हैं बहु फसली और उपजाऊ जमीन का विशेष परिस्थिति में ही

अधिग्रहण ग्रामीण भूमि का मुआवजा बाजार का चार गुणा तथा शहरी जमीन का मुआवजा बाजार का दो गुना 5 साल में प्रोजेक्ट शुरु नहीं हुआ तो किसानो की जमीन वापिस किसी नियम की अनदेखी करने वाले अधिकारी पर कानूनी कार्रवाई इस नियम का विस्तार जम्मू कश्मीर राज्य के अलावा संपूर्ण भारत पर लागू भूमि अधिग्रहण के कारण जीविका खोने वालों को 12 महीने तक प्रति परिवार 3000 रुपए निर्वाह भत्ता अनिवार्य है प्रभावित भूमि हीन परिवार को ग्रामीण क्षेत्र मैं ₹50000 तथा 150 मीटर का मकान बना कर देना शहरी क्षेत्र प्रभावित परिवार को 50 मीटर का मकान बना कर देना विलय संशोधन सुझाव था की जमीन डेवलपर्स को लीज पर दी जाए जमीन का मालिक किसान ही रहे और इससे किसान को सालाना आए भी मिलती रहे यह संशोधन मंजूर कर लिया गया लोकसभा में सितंबर 2011 में बिल पेश किए जाने के बाद अधिग्रहण की गई भूमि के मूल मालिकों को 50 परसेंट मुआवजा दिया जाए 40 परसेंट पर सहमति हुई अनुसूचित जाति जनजाति की जमीन का अधिग्रहण जहां तक संभव है निषेध किया धारा 84 व पचासी में कुछ परिस्थितियां और कृतियों को अपराध बताया झूठी और गलत सूचना फर्जी दस्तावेज पेश कर मुआवजा हासिल करने के लिए गलत काम करने पर सजा दी जा सकती है अनुछेद 254 स्पष्ट करता है कि केंद्र के कानून और राज्य के कानून में असंगती है तो राज्य का कानून केंद्र के विरुद्ध मान्य नहीं होगा राज्य कानून में संशोधन कर सकता है मगर राष्ट्रपति की सहमति के बगैर नहीं अगर राज्य सरकार कानून लाना चाहती है तो प्रभावित वर्ग के प्रति संवेदनशील होना अनिवार्य जिसे यह स्पष्ट हो सके कि राज्य का कानून केंद्र सरकार के कानून से बेहतर है तब इस प्रस्तावित अधिनियम की सार्थकता होगी,, अब जेवर एयरपोर्ट भूमि अधिकरण को यूपी सरकार का तानाशाही रवैया लोकतंत्र की हत्या करार दिया जाए तो गलत नहीं होगा जमीन अधिग्रहण करने से पहले प्रधानी को समाप्त कर अर्बन घोषित कर दिया 2 साल से अर्बन क्षेत्र का रेट नहीं बढ़ाया एयरपोर्ट की विज्ञप्ति पहले जारी कर दी भूमि अधिग्रहण नहीं किया अर्बन क्षेत्र बाद में डिक्लेअर किया जिसमें up सरकार सर्किल रेट का दुगना मुआवजा देने पर किसानो पर दबाव दे रही है जबकि इससे पहले यमुना प्राधिकरण ने पैरीफेरल मैं किसानों को 36 40 रुपए वर्ग मीटर का मुआवजा दिया किसानो की पर्सनल आवादी को आधी करके क्यों दिया जाएगा जबकि हर इंसान परसनल आवादी अपनी जरुरत के हिसाब से रखता है 10 परसेंट एकबार जमीन की आबादी को भी दरकिनार कर दिया किसानों की अन्य सुविधा और जायज मांग तो शायद गुम हो गई 60 परसेंट वोट देकर किसानों ने बीजेपी को सत्ता सौप दी की किसानों का भला होगा जय जवान जय किसान सबका साथ सबका विकास मोदी योगी सरकार में गुम हो गया ऐसा प्रतीत होता है। 2300 रुपए के हिसाब से मुआवजा देना कहां तक उचित है bjp सरकार में किसानो की जायज मांग जो आंदोलन हो रहे हैं उनको लगातार कुचला जा रहा है योगी सरकार में गुमराह और नफरत भली भाति फल फूल रहे हैं सरकारो की जिम्मेदारी बनती है सबके साथ न्याय और इंसाफ करें